Poem On India in Hindi | Bharat desh pe kavita | Independence Poem

तोड़ गुलामी की जंज़ीरें  देश मेरा आज़ाद हुआ  चमक उठे सजल नयन  शहीद जिनका लाल हुआ
                                                                     ★आज़ादी★


तोड़ गुलामी की जंज़ीरें

देश मेरा आज़ाद हुआ

चमक उठे सजल नयन

शहीद जिनका लाल हुआ


बच्चे बूढ़े जवान सभी का

चौड़ा सीना अभिमान हुआ

लहर लहर लहराए तिरंगा

सबका ये अधिकार हुआ


पन्द्रह अगस्त के झंडा वन्दन से

जीवन फिर गुलज़ार हुआ

तिहत्तर सालों की आज़ादी में

क्या पाया ये हिसाब हुआ


नई आशा और नए सपनों का

फिर से आज आगाज़ हुआ

नौजवानों के बिखरे सपनों में

नई ऊर्जा का संचार हुआ


जात धर्म की रस्सा कस्सी से

ऊपर उठने का  अलाप हुआ

अंतिम छोर तक छाए खुशहाली

ऐसा फिर संकल्प हुआ


आओ मिलकर करें प्रतिज्ञा

देश का नव निर्माण करें

तोड़ गुलामी की जंज़ीरें 

देश मेरा आज़ाद हुआ

तोड़ गुलामी की जंज़ीरें 

देश मेरा आज़ाद हुआ


- डॉ.कुमुदिनी

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