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अपनी हिंदी
अपनी बोली अपनी भाषा में
मिसरी सी मिठास है
इसी में हँसना इसी में रोना
अपनेपन की ये एहसास है
दुनिया की विविध भाषा भी
हमको प्यारी लगती है
पर दुलार अपने बच्चों को
निज भाषा में ही अच्छी लगती है
अपनी हिंदी अभिमान हमारी
इसी से हमारी पहचान है
नागरी लिपि में अवतरित हिंदी
मात्राओं का श्रृंगार है
निज भाषा का सम्मान
हमारी हस्ती का आधार है
आदर सत्कार मान मनुहार
इस भाषा की संस्कार है
हिंदी दिवस के शुभ अवसर पर
बधाइयों का अम्बार है
इस भाषा का अस्तित्व बचाना
हम सब का कर्तव्य है
डॉ कुमुदिनी
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Comments

Very nice
ReplyDeletehttps://www.cosmeticsreviewsworld.com/nail-products
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