Poem on hindi diwas || Hindi diwas pe kavita || Apni hindi



अपनी हिंदी


अपनी बोली अपनी भाषा में 

मिसरी सी मिठास है

इसी में हँसना इसी में रोना

अपनेपन की ये एहसास है


दुनिया की विविध भाषा भी

हमको प्यारी लगती है 

पर दुलार अपने बच्चों को

निज भाषा में ही अच्छी लगती है


अपनी हिंदी अभिमान हमारी

इसी से हमारी पहचान है

नागरी लिपि में अवतरित हिंदी

मात्राओं का श्रृंगार है


निज भाषा का सम्मान

हमारी हस्ती का आधार है

आदर सत्कार मान मनुहार

इस भाषा की संस्कार है


हिंदी दिवस के शुभ अवसर पर

बधाइयों का अम्बार है

इस भाषा का अस्तित्व बचाना

हम सब का कर्तव्य है


डॉ कुमुदिनी


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