Hindi Poem on Betiyan | बिटिया रानी पर कविता


ओ बिटिया रानी,नन्हीं सी गुड़िया बाहों के घेरे में,जीवन सुख सारा ।।
बिटिया रानी

ओ बिटिया रानी,नन्हीं सी गुड़िया
भोली सी सूरत में,भूलूँ निराशा
थमी सी ज़िन्दगी में,जीने की आशा
मोहिनी मुस्कान में,भूलूँ हताशा ।

कजरारे नैनों में,जीवन सुख सारा
बाहों के घेरे में,डोलूँ जग सारा
तोतली सी बोली में,तृप्त मेरी पिपासा
डगमग से कदमों में,मेरी अभिलाषा ।

कर्मठता निश्छलता में,जीत का खजाना
तेरी बुलंद हौसलों में,जीतूँ जग सारा
जब तू लड़खड़ाये,बनूँ मैं सहारा
कदमों में बिखरें हों,खुशियाँ बेतहाशा ।

अपने इस जीवन में,गाँठ बाँध लेना
राग-द्वेष के फेर में,तू न समाना
मान-सम्मान देने में,कभी न हिचकना
सामंजस्य बिठाने में,आगे ही रहना ।

किन्तुआत्मसम्मान अपनी,कभी झुकने न देना
छाए जब कभी,जीवन में अँधेरा
मैं हूँ न.....,मेरे पास आना
ओ बिटिया रानी,नन्हीं सी गुड़िया
बाहों के घेरे में,जीवन सुख सारा ।।

डॉ.कुमुदिनी

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