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बेटी की चीत्कार
ओ माँ क्यों जना तुमने मुझे??मार न देती कोख मेंबेटी सुन ,कितने ताने सुने होंगे तुमनेये न हो सका तोफेक आती मुझे झाड़ी मेंक्या होताकुत्ते नोंच खाते मुझेबस यही नाअस्मत तो न लुटती मेरीभरे बाज़ार मेंवो असल जानवर होतेमुखौटे पहने आदमखोर नहीं
ओ माँजब बेटी सुरक्षित नहीं धरा मेंतब कन्या भ्रूण हत्या अपराध का ढोंग क्योंइक बेटी की चीत्कार क्यों सुन न पाती सरकारऊँची पहुँच को ढाकने तोपने का खेल क्योंदेवी बना कब तक सहलाएगी संसारमानुष है उसे सम्वेदना की है दरकारवह भी स्वच्छंद जीने की है हकदारजन आक्रोश बस मोमबत्ती तक सीमित क्योंबीच चौराहे दरिंदों को फाँसी नहीं क्यों जिसे देख सिहर उठे पाशविक सोच
ओ माँआज नर पिशाचों की मैं हुई शिकार कल कोईफिर कोईप्रतिदिन कोई न कोईआज तुम सिसक रही होकल फिर कलेजा फटेगा किसी माँ काअभिमान टूटेगा पिता काकब थमेगा ये सिलसिलाबेख़ौफ़ कब जियेगी बिटियाअब तो जागो सरकारत्वरित करो इंसाफ़त्वरित करो इंसाफ़
- डॉ.कुमुदिनी
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