- Get link
- X
- Other Apps
डर लगता है
कैसा ये संकट कैसी महामारी
अपनों के बीच ही मायूसी भरी दूरी
तुम्हीं से अर्जित हमें निवाला
तुम्हीं को देने में , डर लगता है ।
तुम्हीं हो धुरी घर आँगन के
तुम्हीं से हिम्मत तुम्हीं से हम सब
कैसी ये बेला जीवन में आई
तुम्हीं को छूने में ,डर लगता है ।
तेज भरा तुम्हारा वो चेहरा
निर्णय लेने की तुम्हारी क्षमता
कोरोना व्याधि ने कोहराम ढाया
तुम्हीं को विवश देख ,डर लगता है ।
ज्ञान विज्ञान सभी इससे हारे
चिकित्सक ही भगवान वो ही फ़रिश्ते
मिलेगी कब मुक्ति कोई न जाने
घर से निकलने में ,डर लगता है ।
घरों में कैद रहने की विवशता
सुख दुख में साथ न होने की निराशा
ओ मेरे बन्धु ओ मेरे भ्राता
तुम्हीं से मिलने में डर लगता है ।
(डॉ.कुमुदिनी)
हिंदी कविता प्रेमियों के लिऐ छोटी-बड़ी हर प्रकार की कविताएं एवं कहानियां | स्वरचित एवं अन्य प्रेरणादायक रचनाकारों की रचनाएँ | शेयर करें और अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करें |
अन्य कविताएं
Follow Hindi Kavita Sangrah at

Comments
Post a Comment
PLEASE DO NOT ADD ANY SPAM LINK IN THE COMMENT BOX